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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
युवा समाज को लेकर राष्ट्रवादी भावना में: स्वामी विवेकानन्द
Authors
पॉलि भौमिक
Abstract
किसी एक सन्यासी ने युवा समाज को लेकर सपना देखा था। जब युवाएँ अपना आदर्श और मुल्यबोध खो रही थी नरेनद्रजी ने अवतरित होकर इससे बचने का पथ दिखाया। सन्यासी तो थे परंतु तेजदीप्त, वीर तथा साहसी भी। ऐसे ही एक सन्यासी ने १२ जनवरी सन्‌ १८६३ में कलकत्ता (सिमला) में दत्तपरिवार में जन्मग्रहण किया और इस धरती को धन्य किया था। उनका नाम था नरेद्रनाथ दत्त, पिता विश्वनाथ दत्त - विख्यात वकील तथा माता भुवनेश्वरी देवी ईश्वर की एकनिष्ठ साधिका। विवेकानन्द नवभारत निर्माण का सपना देखते थे और इसके लिए उन्हे युबाओँ पर सबसे बड़ी आस्था थी। युवा शक्ति के भीतर जो अनन्त शक्ति थी वे उसे जगाना चाहते थे। समकालीन भारत का युवा समाज, मोहग्रस्त तथा दिशाहीन होता जा रहा था युवावर्ग लक्ष्यहीन और निराश हैं तथा स्वयं की रक्षा से अज्ञात है। ऐसे अध:पतित युवाओं को पुन: जाग्रत तभी किया जा सकता है जब उनकी पहचान स्वामीजी से करायी जाए। स्वामीजी की उत्‌साहवर्धक तथा आदर्शमूलक वाणी में अध्यात्मचेतना, समाजचेतना, अर्थनैतिकचेतना, विज्ञानचेतना, भारत के भूत तथा भविष्य की कथा, भारतीय संस्कृति की कथा अंन्तर्निहित है। स्वामीजी बारंबार कहते थे – “इस दिशाहीन युवासमाज को वर्तमान सुन्दर समाज में परिवर्तन करने के लिए आवश्यक है असंख्य लोगो की। सबसे पहले वे इंसान बने, ज्ञानी इंसान, दयावान इंसान, देश से प्रेम करनेवाला इंसान जो पवित्र और श्रद्धावान हो, ऐसा इंसान जिस दिन जागेगा उस दिन भारतवर्ष सर्वाधिक सुन्दर और बड़ा बन जायेगा, जब हजारो संख्या में नर-नारी खुद के भोग की आकांक्षाओ का त्याग कर सामने आएँगे तथा गरीबी और अशिक्षा के चक्रव्यूह में फँसे लाख-लाख इंसानों के कल्याण कामना हेतु एक निष्ठ होकर जागेगे तभी भारत जाग उठेगा”।
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Pages:9-15
How to cite this article:
पॉलि भौमिक "युवा समाज को लेकर राष्ट्रवादी भावना में: स्वामी विवेकानन्द ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 9-15
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