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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
भारत में धार्मिक पर्यटन- अतीत, वर्तमान और भविष्य
Authors
डॉ. सुरभि सिंह
Abstract
प्राचीन समय में लोग खाना खोजने, खोज व व्यापार करने के लिए यात्रा किया करते थे। कुछ समय बाद छुट्ठियों का समय बिताने के लिए पूरे ग्रह पर यात्राऐं होने लगीं। तकनीकी विकास ने यात्राओं को अधिक आसान, सुविधापूर्ण व पहले से काफी तीव्र (कम समय लेने वाला) बना दिया है। भारत में यात्राओं व पर्यटन का बडा ही पुराना इतिहास रहा है। सदियों से तीर्थाटन के लिए, फिर रेषम व मसालों के व्यापार के लिए, आगे चलकर ब्रिटिष साम्राज्य में हिल स्टेषनों के विकास के बाद यात्राऐं बढती ही चली गईं। पर्यटन वर्तमान समय में एक नई ऊर्जा के रुप में आर्थिक जगत में उभर कर आया है। पर्यटन को दुनिया में षीघ्रता से बढता हुआ उद्योग समझा जा रहा है। हमारे ऋषि-मुनि मानवी मनोविज्ञान के कुशल मर्मज्ञ अर्थात जानकार होते थे। प्राचीन ऋषि-मुनि लिबास से भले ही साधु-संत थे, किंतु सोच और कार्यशैली से पूरी तरह से वैज्ञानिक थे। दुनिया को मोक्ष का मार्ग वैदिक ऋषियों ने ही बताया। दुनिया के किसी भी धर्म की अंतिम मान्यता यही है कि आत्मज्ञान या पूर्णता की प्राप्ति ही इंसानी जिंदगी का एकमात्र अंतिम ध्येय है। धरती पर पहली बार वैदिक ऋषियों ने धर्म को एक व्यवस्था दी और वैज्ञानिक विधि-विधान निर्मित किए। दुनिया के बाद के धर्मों ने उनकी ही व्यवस्था और धार्मिक विधि-विधान को अपनाया। उन्होंने संध्यावंदन, व्रत, वेदपाठ, तीर्थ, 24 संस्कार, उत्सव, यम-नियम, ध्यान आदि को निर्मित किया और इसे धर्म का आधार स्तंभ बनाया। उनके ही बनाए संस्कारों और नियमों को आज सभी धर्म के लोग अपना रहे हैं। धर्म के इन्हीं नियमों में से एक है- धार्मिक पर्यटन अथवा तीर्थयात्रा। इसीलिए प्रस्तुत शोधपत्र में शोधकर्ता द्वारा भारत में धार्मिक पर्यटन- अतीत, वर्तमान और भविष्य का अध्ययन किया गया है।
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Pages:18-24
How to cite this article:
डॉ. सुरभि सिंह "भारत में धार्मिक पर्यटन- अतीत, वर्तमान और भविष्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 18-24
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