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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
‘रामचरितमानस‘ और ‘बज्जिका रामायण‘ की माता सुमित्रा का तुलनात्मक विश्लेषण
Authors
रश्मि किरण
Abstract
मातृत्व एक ऐसी गरिमा है, जिसके आगे सभी नतमस्तक होते है। जन्म देने के कारण माता जननी कहलाती है। महर्षि बाल्मीकि ने रामायण में इस शब्द को चरितार्थ किया है। यथाः ‘‘जननी जन्मभूमिष्च स्वर्गादऽपि गरीयसी।’’ आज हासोन्मुखी नैतिकता के युग में धन से सबकुछ खरीदा जा सकता है, किन्तु माता का स्नेह और उसकी ममता नहीं खरीदी जा सकती है। माँ अपनी संतानों को असीम स्नेह देती है। वह उसे अपना स्निग्ध दूध पिलाती है एवं ज्ञान-दान देती हुई, उसे एक सुयोग्य नागरिक बनाती है। महाकाव्य द्वय में सुमित्रा पत्नी माता एवं विमाता-इन तीनों रुपों में वर्णित हुई है। उनके ये तीनों रुप उसके चरित्र की कसौटी है। सुिमत्रा दोनों ही महाकाव्यों की सर्वश्रेष्ठ मातृत्व की धनी है, वह सर्वश्रेष्ठ माता है। वह लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न जैसे वीरवर की माता है साथ ही श्रीराम एवं भरत की विमाता भी है। वह राम की माता कौशल्या एवं भरत माता कैकेयी से सर्वथा भिन्न है। भरत माता कैकेयी तो सर्वविदित है कि अपने पुत्र मोह के लिए सौत पुत्रों को वन भेज देती है इस कारण उसे वैध्वय की जिंदगी गुजारनी पड़ती है तथा सारे संसार में अपने कुकृत्य के कारण उन्हें शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, वहीं माता कौशल्या अपने प्राणो से प्यारे पुत्र को वन जाते हुए देखकर सुध-बुध खो देती है। लेकिन सुमित्रा अपनी संतानों को लेकर लेश मात्र भी स्वार्थिनी नहीं है। अपितु वह खुशी-खुशी अपने पुत्र को राम की सेवा करने के लिए वन भेज देती है। वह अपने और सौत पुत्रों के साथ कोई भेद भाव नहीं करती है। वह एक विवेकशीला एवं संतानों की वास्तविक हितैषिणी एवं आदर्श माता है। सुमित्रा वीर जननी है। उनके दोनों ही पुत्र वीर है। उन्होंने निडर होकर सारे कार्य किए। सुमित्रा कर्त्तव्य पर भावुकता को हावी नहीं होने देती है। वह अपने पुत्र मोह के वशीभूत होकर सन्मार्ग से रोकती नहीं है। वह तो पुत्र के कल्याण को देखकर उसका मार्गदर्शन करती हुई धर्मरक्षार्थ, जन कल्याण के लिए श्रीराम के साथ वन भेज देती है। माता सुमित्रा में कल्याणमयी भावनाएँ निहित हे। उसने अपने दोनों पुत्रों में समाज एवं राष्ट्र कल्याण की भावना को विकसित किया। इसप्रकार, हम कह सकते है कि लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न में यह सब गुण माता सुमित्रा के कारण ही है। इस तरह दोनों ही महाकाव्यों की माता सुमित्रा कल्याणमयी है। उसका चरित्र आज और अधिक अनुकरणीय है।
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Pages:58-60
How to cite this article:
रश्मि किरण "‘रामचरितमानस‘ और ‘बज्जिका रामायण‘ की माता सुमित्रा का तुलनात्मक विश्लेषण ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 58-60
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