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VOL. 8, ISSUE 1 (2022)
वर्तमान परिदृश्य में आचार्य विनोबा भावे के विचारों की प्रासंगिकता
Authors
अनिल कुमार सैनी
Abstract
आचार्य विनोबा भावे का आगमन ऐसे समय में हुआ जब हमारा देश ब्रिटिश दासता के अधीन आहें भर रहा था तथा भारतीय चिन्तन रुक सा गया था। सम्पूर्ण समाज में शोषण एवं अराजकता का वातावरण छाया हुआ था। समाज में भोगवादी अपसंस्कृति घर कर गई थी। सम्पूर्ण देश में अंग्रेजी शिक्षा का बीज बोया जा रहा था। लार्ड मैकाले द्वारा हमारी संस्कृति एवं साहित्य का उपहास उड़ाया जा रहा था। वस्तुतः जो ऋषि है, विचारक है, युग पुरुष है उनके प्रत्येक कार्य युग की आवश्यकता के तथा जमाने की माँग के अनुकूल होते हैं। विनोबा जी द्वारा शुरू किया गया भू-दान, सम्पत्ति दान, ग्रामदान, श्रमदान आदि यज्ञ आज भी हमारे जमाने की सबसे बड़ी समस्याओं के लिए एक महान चुनौती है। जो क्रान्ति की भावना रखते हैं, क्रान्ति के मार्ग पर निरन्तर बढ़ते चलना चाहते हैं। थक कर या निराश होकर बैठे रहना नहीं चाहते हैं, उनके लिए इस क्रान्ति के अग्रदूत के पद चिन्हों पर चलने की तथा उनके द्वारा बताये गये कार्यों को आगे बढ़ाने की आज भी आवश्यकता हैै। जो लोग मानते हैं कि कौतुक का युग नहीं रहा उनके लिए विनोबा जी का कार्य एक चुनौती के रूप में मौजूद है।
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Pages:49-51
How to cite this article:
अनिल कुमार सैनी "वर्तमान परिदृश्य में आचार्य विनोबा भावे के विचारों की प्रासंगिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 1, 2022, Pages 49-51
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