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VOL. 8, ISSUE 2 (2022)
वाल्मीकि रामायण में वर्णित सैन्य व्यवस्था
Authors
आशीष कुमार बिठौरे
Abstract
रामायण आदिकवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य हैं, इसमें 24000 श्लोक हैं। यह हिन्दू स्मृति का एक ऐसा महाकाव्य रूपी अंग है, जिसके माध्यम सेे रघुकुल के राजा राम के पुरूषार्थ व प्रतिबद्धता की कहानी कहीं गई है। इसमें सात अध्याय है जो कि काण्ड के नाम सेे जाने जाते हैं, बाल काण्ड, अयोध्या काण्ड, अरण्य काण्ड, किष्किंधा काण्ड, सुन्दर काण्ड, युद्ध काण्ड तथा उत्तरा काण्ड। रामायण को चतुर्विशित एवं सहस्त्री-संहिता के नाम सेे भी जाना जाता है, इसके काल निर्धारण में विद्वानों के अनेक मतभेद है फिर भी अनुमानतः कहाँ जा सकता है की रामायण की रचना उस समय हुई जब काव्य शास्त्री लक्षण ग्रंथों का सर्वथा आभाव था। हम इसकी सर्वांगीणता का अनुमान इस बात से लगा सकते है, कि संस्कृत साहित्य में लगभग सभी प्रमुख कवियों ने रामकथा को अपना उपजीव्य बनाया। रामायण उस संधिकाल की रचना है, जब वैदिक आर्य लौकिकता की और अग्रसर हो रहे थे। वैसे तो रामायण मानव जीवन का सर्वांगीण आदर्श प्रस्तुत करती है, किन्तु राजनीतिक दृष्टि से प्रकाश डाला जाये तो यह राजा के कर्तव्य और अधिकार, राजा-प्रजा सम्बन्ध, नागरिकता, उत्तराधिकार-विधान, शत्रु संहार, पाप-विनाशन, सैन्य संचालन आदि विषयों पर प्रकाश डालता हैं।
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Pages:48-50
How to cite this article:
आशीष कुमार बिठौरे "वाल्मीकि रामायण में वर्णित सैन्य व्यवस्था". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 2, 2022, Pages 48-50
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