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VOL. 8, ISSUE 2 (2022)
अलका सरावगी कृत उपन्यास ‘शेष कादम्बरी’ में नारी विमर्श
Authors
युगल किशोर यादव
Abstract
नारी विमर्श साहित्य के माध्यम से उस विचारधारा का पर्याय है जिसके तहत नारी को वास्तविक रूप से मनुष्य के रूप में प्रतिष्ठा दिलाकर उसकी स्वतंत्रता और वाजिब अधिकारों को दिए जाने की पैरवी करता है। पितृसत्ता में नारी प्रारम्भ से ही वंचित और उपेक्षित रही है। उसकी नियति उस द्रव्य के समान रही है जिसे किसी भी पात्र में ढाल दिया जाए तो वह उसी का आकार ले लेती है। अतः नारी का अपना कुछ भी नहीं था। नारीवादी विचारधाराओं ने नारी को अपने जीवन के बारे में सोचने के लिए विवश किया। उन्हें अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए समय-समय पर उकसाया है। अतः नारी विमर्श ने नारी समाज को वह धरातल प्रदान की है जहाँ से नारी न्याय और अपने हक की आवाज को बुलन्द कर सकें।
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Pages:65-67
How to cite this article:
युगल किशोर यादव "अलका सरावगी कृत उपन्यास ‘शेष कादम्बरी’ में नारी विमर्श". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 2, 2022, Pages 65-67
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