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VOL. 8, ISSUE 3 (2022)
ज्वर रोधक, कीटाणु रोधक व प्रतिरोधक क्षमता वाले औषधीय पौधों का मानव जीवन में महत्त्व
Authors
Sonali Sajwan, A S Khan, R P Meena, P K Sagar
Abstract
प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि मुनि औषधीय पौधों का प्रयोग कर अनेकानेक रोगो का निवारण करते रहे है। पुराने समय में बीमारियों के उपचार का एकमात्र साधन पौधे ही थे। इन पौधों को प्राकृतिक रूप में,अर्क या चूर्ण के रूप में कूट-पीसकर प्रयोग किया जाता था। लेकिन अब आज के समय में औषधीय पौधों पर खोज करके इनके क्रियाशील तत्त्वों को पहचान और निकाल कर प्रयोग किया जाने लगा है। प्राचीन काल से ही आयुर्वेदिक व यूनानी औषधियों का प्रयोग विभिन्न बीमारियों के इलाज व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए होता रहा है। आज भी इस कोरोना काल के दौरान आयुर्वेदिक व यूनानी औषधियों का प्रयोग ज्वर रोधक,कीटाणु रोधक व प्रतिरोधक दवाओं के रूप में बहुतायत में किया जाता रहा है। इस पेपर में मुखयतः ग्यारह औषधीय पौधों -गिलोय, दालचीनी, पीपली, काली मिर्च, लेमनग्रास, वन तुलसी, अश्वगंधा, हल्दी और सौंठ, पपीते का पत्ता आदि के औषधीय गुणों के विषय में विस्तार में चर्चा की गयी है।
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Pages:25-31
How to cite this article:
Sonali Sajwan, A S Khan, R P Meena, P K Sagar "ज्वर रोधक, कीटाणु रोधक व प्रतिरोधक क्षमता वाले औषधीय पौधों का मानव जीवन में महत्त्व". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 3, 2022, Pages 25-31
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