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VOL. 8, ISSUE 4 (2022)
प्रभा खेतान की कविताः अस्तित्व एवं अस्मिता की खोज में नारी
Authors
पूनम आर्या
Abstract
हिन्दी साहित्य की बहुचर्चित लेखिका प्रभा खेतान एक श्रेष्ठ महिला लेखिका है । उनका अधिकंाश साहित्य, समाज और स्वयं के जीवन में आये अनुभवों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने समाज में जो भी देखा, जो भी महसूस किया उसे, अपनी लेखनी के माध्यम से उजागर किया। प्रभा जी की जितनी लेखनी की कलम गद्य साहित्य में चली, उतनी पद्य साहित्य में नहीं, किन्तु उनके लेखन का पदार्पण हिन्दी साहित्य में कविता के माध्यम से ही हुआ हैं। प्रभा जी ने नारी अस्तित्व एवं अस्मिता की खोज में नारी की पीड़ाओं को जितना अपनी मां के जीवन से ग्रहण किया है उतना तो शायद पुस्तकों से भी नही किया । प्रभा जी ने जब भी समाज को देखा तब-तब उन्होंने सामाजिक असमानताओं के चलते नारी को चारदीवारी में कैद ही पाया, उनकी नजर में नारी सिर्फ एक कठपुतली से ज्यादा ओर कुछ भी नही थी। इन सभी कारणों से प्रभा जी की नारीवादी सोच मजबूत होती चली गयी, और अपनी इसी सोच के कारण उन्होंने अपनी पहली कविता प्रकाशित की। जिसमें उन्होंने कविता के माध्यम से नारी जीवन के अस्तित्व और अस्मिता की खोज की है और नारी को अपने अस्तित्व के प्रति सचेष्ट भी किया हैं। सामाज में नारी की अवहेलना को अपने आगोश में समेटते हुए, अपनी अधिकांश कविताओं में नारी के अस्तित्व को कायम करने के लिए, और भविष्य में नारी को एक नई ऊंचाइयों तक पहुचाने कि लिए प्रभा जी ने जी-तोड़ मेहनत की है। यही कारण है कि, प्रभा जी ने अपनी कविता के माध्यम से युगों से दमित, शोषित नारी को विषम परिस्थितियों में स्वंय लड़ना सिखाया। इनके अधिकांश काव्य संग्रह में नारी सामाजिक बंेड़ियों को तोड़ती हुई, अपने अस्तित्व और अस्मिता की खोज में निकल पड़ी हैं। वह समाज को यह भी याद दिलाना चाहती है कि उसमें अथाह समुद्र सा आवेग भी और सृष्टि को सृजन करने वाली सृजनधर्मिता भी हैं। वह पुरूष से अपने अस्तित्व की अलग पहचान बनाने के लिए इस धरातल में अडिग खड़ी है।
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Pages:52-54
How to cite this article:
पूनम आर्या "प्रभा खेतान की कविताः अस्तित्व एवं अस्मिता की खोज में नारी". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 4, 2022, Pages 52-54
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