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VOL. 8, ISSUE 6 (2022)
नागरिक विज्ञान एवं जैव विविधता संरक्षण में इसकी भूमिकाः एक समीक्षा
Authors
चिंतामणि टान्डिया, मंजुला वर्मा, भगवंता सिंह बघेल, नवीन कुमार शर्मा, शिवाजी चौधरी
Abstract
वर्तमान परिदृश्य मे विकास और प्राकृतिक विनाश पर्यायवाची बन चुके हैं, ना ही विकास का रथ थामा जा सकता और ना ही प्राकृतिक विनाश को मंद किया जा सकता हैं । हम भी प्रकृति के अभिन्न अंग हैं और अथाह विकास के उपरांत इसका कोई विकल्प नहीं, ऐसे में जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन बनाये रखना हमारे अस्तित्व के लिए आवश्यक है । जैव विविधता संरक्षण हेतु प्रयास प्रशासन के हाथों में थी, लेकिन कालांतर में यह महसूस किया गया कि संरक्षण जन भागीदारिता के बगैर असंभव है । नागरिक विज्ञान एक नवीन उदयमान विषय है, वैज्ञानिक प्रयासों को आम व्यक्ति को जोड़ने का एक भागीरथ प्रयास है । संरक्षण परियोजना और सरकारी प्रयास में समय, साधन और आर्थिक संसाधन सीमित होने के कारण यह प्रयास जमीनी स्तर मे उतारने में काफी कठिनाइयाँ होती हैं । ऐसे में नागरिक विज्ञान एक प्रभावी साधन बन सकता है जिससे प्रजातीय संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखने में एकत्रित आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विश्व स्तर पर कई प्रयास संकलित है जिसमे नागरिक विज्ञान टोली को प्रशिक्षण उपरांत एकत्रित आंकड़े को आधुनिक सूचना तंत्र के द्वारा जोड़ा गया, जिसमे कंप्यूटर, स्मार्ट-फोन और वेबसाइट और मोबाइल एप शामिल हैं।
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Pages:20-24
How to cite this article:
चिंतामणि टान्डिया, मंजुला वर्मा, भगवंता सिंह बघेल, नवीन कुमार शर्मा, शिवाजी चौधरी "नागरिक विज्ञान एवं जैव विविधता संरक्षण में इसकी भूमिकाः एक समीक्षा". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 6, 2022, Pages 20-24
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