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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 8, ISSUE 6 (2022)
स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में सामाजिक दुविधा का एक अध्ययन
Authors
दीपक कुमार
Abstract
आज के समय में सबसे आगे चल रहा है तो वो है- राजनीति। चाहे वह परिवार हो, समाज हो, विद्यालय हो, महाविद्यालय हो या विश्वविद्यालय। राजनीति के चलते आज विद्यार्थियों को उनके मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। विद्यार्थियों को विद्यालय में मिलने वाले छात्रवृत्ति से लेकर विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा एवं विदेशी जाकर शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रवृत्ति ही हो, आज राजनीति के चलते गरीब एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति से कमजोर विद्यार्थी इसका फायदा नहीं उठा पाते हैं चाहे वह कितनी भी शैक्षिक योग्यता रखते हो। ऐसी अवस्था में गरीब एवं निम्न सामाजिक-आर्थिक स्थिति के उच्च शैक्षिक योग्यता रखने वाले विद्यार्थी को उसका लक्ष्य न प्राप्त होना उसमें संघर्ष का उत्पन्न होना उसके सामाजिक दुविधा को बढ़ा देता है और वह जीवन में लक्ष्यों को न प्राप्त करने के कारण वह किसी न किसी रूप में दूसरों को नुकसान पहुँचा सकता है। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि आज की शिक्षा व्यवस्था मंे सामाजिक दुविधा बहुत उँचे स्तर पर देखा जा सकता है जिसमें भाई, भतीजावाद के साथ-साथ जातिवाद, क्षेत्रवाद एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति के साथ-साथ चाटुकारिता भी घुस चुकी है जिससे विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाएँ सभी को नही मिल पा रही है और वही कुछ विद्यार्थी अपने को सामंजस्य स्थापित कर लेते हैं तथा कुछ इसके विपरीत विचारों को मन में रख लेतेे हैं जिससे उनमें विद्यालय के प्रति उनके द्वन्द्व बढ़ने लगते हैं।
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Pages:32-34
How to cite this article:
दीपक कुमार "स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में सामाजिक दुविधा का एक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 6, 2022, Pages 32-34
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