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VOL. 9, ISSUE 1 (2023)
हिन्दी के आंचलिक उपन्यासों में समाज
Authors
डॉ. राजेन्द्र सिंह
Abstract
निष्कर्ष रूप में कह सकते हैं कि भारतीय समाज में संयुक्त परिवार विघटन के फलस्वरूप श्रद्धा, सम्मान, आज्ञाकारिता इत्यादि मूल्यों में संक्रमण की स्थिति उत्पन्न हुई जिसने पारिवारिक व्यवस्था को अव्यवस्थित कर दिया। केवल यही नहीं जातीयता एवं साम्प्रदायिकता के भेदभाव ने सामाजिक नींव को हिला दिया जिससे जीवन मूल्यों में अवमूल्यन की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस प्रकार आंचलिक उपन्यासकारों ने सामाजिक यथार्थ का चित्रण करके नैतिक मूल्यों में आए विघटन को प्रदर्षित कर सामाजिक ताने-बाने पर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से कठोर प्रहार किए हैं ताकि अवमूल्यन की इस त्रासदी से समाज को बचाया जा सके और सामाजिक ताना-बाना सुरक्षित रह सके।
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Pages:52-54
How to cite this article:
डॉ. राजेन्द्र सिंह "हिन्दी के आंचलिक उपन्यासों में समाज". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 1, 2023, Pages 52-54
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