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VOL. 9, ISSUE 1 (2023)
सूर्यबाला के कथा साहित्य में दाम्पत्य जीवन
Authors
सोनाली घटक
Abstract
दाम्पत्य जीवन पारिवारिक जीवन का मूलाधार है। पारिवारिक जीवन की सुख-समृद्धि एवं शांति पति-पत्नी के पारस्परिक सहयोग पर निर्भर करती है। धीरजभाई वणकर ने दाम्पत्य सम्बन्धों को स्पष्ट करते हुए लिखा है, ‘‘पति एवं पत्नी का मिलन स्थल जगत है। इन दोनों के मिलन से विश्व का नैरन्तर्य सम्भव है। शिव व शक्ति या पुरुष व प्रकृति अर्थात पति व पत्नी से ही विश्व का निर्माण होता है। एक के अभाव में दूसरे का ही नहीं अपितु हमें संसार का भी अभाव मानना पड़ेगा।’’1 इस प्रकार संसार का निर्माण स्त्री-पुरुष के द्वारा ही सम्भव है। पति-पत्नी सम्बन्धों की कटुता समस्त पारिवारिक परिवेश को विषाक्त बना देती है। मनुष्य का विकास बहुत अंशों में उसके पारिवारिक परिवेश पर निर्भर करता है। दाम्पत्य जीवन पर समर्पित व्यक्तित्व समर्पण चाहता है परन्तु समर्पण की यह भावना आज के समय में विलुप्त होती जा रही है। दोनों का व्यवहार एक-दूसरे के प्रति भाव शून्य होता जा रहा है।
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Pages:13-14
How to cite this article:
सोनाली घटक "सूर्यबाला के कथा साहित्य में दाम्पत्य जीवन". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 1, 2023, Pages 13-14
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