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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
योग दर्शन के परिप्रेक्ष्य मे पुरूष और पुरूषार्थ की अवधारणा
Authors
गायत्री प्रजापति
Abstract
योग दर्शन मे प्रकृति और पुरूष दो तत्वो की प्रमुख रूप से व्याख्या की गई है जिसमे पुरूष तत्व को चैतन्य और प्रकृति को जड कहा है। योग दर्शन मे पुरूष, पुरूषार्थ, पुरूषशून्यता का वर्णन चक्रव्यूहवाद मे ही हो जाता है इन चार चक्रो मे पुरूष दुखो से मुक्ति पा लेता है। पुरूष अविद्या के कारण संसार के माया जाल मे फंस जाता है इस माया जाल से निकल कर कैवल्य प्राप्ति तक के उपाय का वर्णन योग सूत्र मे है।
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Pages:23-24
How to cite this article:
गायत्री प्रजापति "योग दर्शन के परिप्रेक्ष्य मे पुरूष और पुरूषार्थ की अवधारणा". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 23-24
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