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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
मुक्तिबोध का प्रगतिवादी दृष्टिकोण
Authors
सावित्री सूर्यकांत मांढर
Abstract
मार्क्सवादी दर्शन पर आस्था रखनेवाले और जनक्रांति का स्वप्न देखनेवाले मुक्तिबोध की प्रगतिवाद के बारे में धारणा क्या थी? यह जानना इस शोध पत्र का प्रमुख प्रयोजन हैं। कुछ लोग उन्हें अस्तित्ववादी मानते हैं, तो कुछ लोग उन्हें प्रगतिवादी मानते हैं, तो कुछ लोग प्रयोग वादी मानते है, इसीलिए इस कवी के साहित्यिक भूमिका को स्पष्ट करना तथा उनके प्रगतिवादी दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से जानना यही इस शोधकार्य का उद्देश्य हैं। मुक्तिबोध के काव्य में प्रयोगवाद और प्रगतिवाद का रासायनिक मिश्रण हैं। वे एक साथ ही प्रयोगवादी भी हैं और प्रगतिवादी भी। उनकी प्रगतिवादी भूमिका किस तरह की रही हैंश् इसी उद्देश्य से इस शोधपत्र का लेखन किय हैं। उन्होंने प्रयोगवाद के प्रणेता श्अज्ञेयश् जी द्वारा संपादित तारसप्तक में अपना काव्य लेखन किया फिर भी वे एक प्रगतिवादी कवी कहलाते है। वे अन्य प्रगतिवादियों की तरह नहीं हैं। यह शोधपत्र इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्यों की यह उन्हें अन्य प्रगतिवादियों से अलग करता हैं तथा अधिक जानकारी प्राप्त कराता हैं।
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Pages:1-3
How to cite this article:
सावित्री सूर्यकांत मांढर "मुक्तिबोध का प्रगतिवादी दृष्टिकोण". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 1-3
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