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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
राजस्थानी लोक साहित्यः पर्यावरण एवं जीवन मूल्य
Authors
मधु
Abstract
अपनी विशिष्ट भौगोलिक संरचना, सांस्कृतिक विविधता, समृद्ध व उन्नत सांस्कृतिक परंपराओं के कारण राजस्थान प्रदेश का भारत के इतिहास में प्राचीन काल से ही गौरवमयी स्थान रहा है। इतिहास से जुड़ी अनेक विशिष्ट घटनाओं के कारण प्राचीन काल से ही राजस्थान प्रदेश इतिहासकारों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। इस प्रदेश के गौरवमयी इतिहास को जानने में लोक साहित्य का महत्वपूर्ण योगदान है। जिनमें लोक कथाएं, अनुष्ठान गीत, किंवदंतिया, लोक गीत, लोक गाथा, लोक नाट्य और लोक संगीत आदि शामिल हैं। जो प्राचीन काल से ही इस प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लोक साहित्य में कहावतों, गीतों, लोक कथाओं और लोक नाट्य का प्रमुख स्थान माना जाता है। प्रस्तुत शोध पत्र के अंतर्गत पर्यावरण-पारिस्थितिकी संदर्भों से जुड़ी अनेक ऐसी राजस्थानी लोक कहावतों, लोक गीतों का संग्रह करने का प्रयास किया गया है, जो समाज में समय के अनुसार चलन -प्रचलन में रही तथा मानव जीवन से जमीनी स्तर पर जुड़ी हुई है। वास्तव में राजस्थानी लोक साहित्य राजस्थान के लोगों के उन्नत जीवन मूल्यों, लोकाचारो, परंपराओं, रीति रिवाजों की जानकारी प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। किसी समूह विशेष या किसी अन्य तरह के आपेक्ष में समझने की बजाय राजस्थानी लोक साहित्य को मानव जीवन से जुड़े विभिन्न सांस्कृतिक प्रतिबिंबो के रूप में दिखाना ही शोधार्थी का उद्देश्य है। प्रस्तुत शोध पत्र में शोधार्थी द्वारा राजस्थानी लोक साहित्य के जिन संदर्भों का प्रयोग पर्यावरण पहलूओं (पर्यावरण प्रबंधन, पर्यावरण चेतना, पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता) को उजागर करने के लिए किया गया उसके माध्यम से राजस्थान के लोगों को उनकी उन्नत संस्कृति से परिचित कराने का यह शोध पत्र एक यत्न मात्र है।
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Pages:4-7
How to cite this article:
मधु "राजस्थानी लोक साहित्यः पर्यावरण एवं जीवन मूल्य". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 4-7
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