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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
सुशीला टाकभौरे की कहानियों में दलित चेतना
Authors
विनोद बाबुराव मेघशाम
Abstract
आजकल समाज में शिक्षा की बढोत्तरी को देखा तो इसका श्रेय डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर जी को जाता है। क्योंकि उन्होंने जो शिक्षा की बीज बोया था जिससे दलित समाज में उनके उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया और बाबा साहब ने कहा था कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पीएगा दहाड़ेगा। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज में चेतना और जागृति ला सकती है। दलित साहित्य डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के क्रांतीकारी विचारों से प्रभावित हो कर हिन्दी साहित्य में दलित साहित्यकारों ने अपनी लेखनी के द्वारा दलितोंपर होनेवाले उच्चवर्णीयों के शोषण, अन्याय, जातिगत भेदभाव, कट्टर कुप्रथाओं के नाम सदियों से सामाजिक अपमान जैसे विषयों को अपनी लेखनी का विषय बनाकर उनकी भावनाओं तीव्ररूप देने का काम किया है। दलित साहित्य में सुशीला टाकभौरे की कहानियाँ आंबडेकर के विचारों से प्रेरित है। समाज में महिला रचनाकारों के जीवन व सृजन के बीच निरन्तर संघर्ष व युध्द की स्थिति ही बनी रहती है। वही आपको डॉ. सुशीला टाकभौरे हिंदी दलित साहित्य के सर्वश्रेष्ठ महिला साहित्यकारों में से एक जो अपनी कहानियों के माध्यम से दलित समाज की सामजिक, धार्मिक, आर्थिक, नैतिक और शैक्षिक स्थिति के चित्रण के साथ सवर्णों के द्वारा होनेवाले अन्याय अत्याचारों के प्रति अपने विद्रोह और परिवर्तनवादी विचारों को स्पष्ट किया है।
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Pages:31-34
How to cite this article:
विनोद बाबुराव मेघशाम "सुशीला टाकभौरे की कहानियों में दलित चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 31-34
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