ARCHIVES
VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
संयुक्त परिवार विघटनः आश्रयहीन वृद्ध
Authors
नीलिमा, डॉ. बृजलता शर्मा
Abstract
संयुक्त पारिवारिक अवधारणा का विघटन पारंपरिक संरचनाओं के टूटने को परिदर्शित करता है। संयुक्त परिवारिक अवस्था अर्थात अनेक विस्तारित रिश्ते पीढ़ी दर पीढ़ी, जिसमें सभी परिवारिक सदस्य एक साथ रहते हुए संसाधनों, जिम्मेदारियों और रहने की जगह को आपस में साझा करते हैं। वर्तमान में हमारे समक्ष एक विचित्र पर अत्यधिक खतरनाक समस्या समाज में पैर पसार रही है, जिसके कुप्रभाव से कोई नहीं बच सकता है; चाहे आप कितने ही साधन संपन्न क्यों ना हो ? वृद्धावस्था में वयोवृद्धों व्यक्तियों की देखभाल की सुनिश्चितता। इस समस्या के मूल में संयुक्त परिवारिक अवधारणा का विघटन एक मुख्य कारण है। भारत में सदैव संयुक्त परिवार की अवधारणा को ही प्राथमिकता दी जाती रही हैं। आज समाज में स्थिति बदल चुकी है। एकाकी जीवन में जीने की शैली अपनाने को सभी में जैसे होड़ सी लगी है। जिसके ऐसे परिवर्तन को किस नजर से देखा जाए? इसके मूल में कई कारण, निवारण, प्रभाव, कुप्रभाव एवं दुष्परिणाम भी समाज में देखने को मिल रहें हैं। अतः इस विषय पर शोध पत्र के माध्यम से समझने और जानने योग्य कुछ तथ्यों को उजागर किया जा रहा है।
Download
Pages:35-38
How to cite this article:
नीलिमा, डॉ. बृजलता शर्मा "संयुक्त परिवार विघटनः आश्रयहीन वृद्ध". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 35-38
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

