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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
पारिजात उपन्यास में अभिव्यक्त स्त्री विमर्श
Authors
संतोष देवी
Abstract
उपन्यास में स्त्रियों के विभिन्न रूपों की चर्चा की गई है जिनमें कुछ स्त्रियाँ ऐसी हैं जो दूसरों के सहारे नहीं जीती अपितु आत्मनिर्भर हैं। रूही आत्मनिर्भर स्त्री का प्रतिनिधित्व करती है। वह पढ़ी-लिखी स्त्री है। वह जीवन में अनेक कठिनाईयाँ आने के बावजूद भी अपने जीवन को सँभालती है तथा समाज-कल्याण की भावना से ओत-प्रोत है। समाज में स्त्री तभी तक सुरक्षित है जब तक वह किसी पुरुश अर्थात् पिता, पुत्र, भाई की छत्रछाया में हो, किन्तु जैसे ही उसके सर से पुरुष का साया हटता है तो उसके सगे-संबंधी भी मौके का फायदा उठाने से पीछे नहीं हटते। इसका वर्णन लेखिका ने जुलिफकार और नुसरतजहाँ की छमाही फातिहे में आई हुई युवती के माध्यम से किया है जिसके विधवा होते ही जेठ और ससुर परेशान करते हैं। लेखिका ने केवल विधवा नारी की समस्या को ही नहीं दर्शाया अपितु रोहन और रूही के विवाह के माध्यम से विधवा के पूर्ण विवाह का समर्थन भी किया है।
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Pages:20-22
How to cite this article:
संतोष देवी "पारिजात उपन्यास में अभिव्यक्त स्त्री विमर्श". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 20-22
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