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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 4 (2023)
समसामयिक दृष्टि से सुभद्रा कुमारी का स्त्री विमर्श
Authors
जयन्ती मिश्रा
Abstract
‘‘स्त्री पैदा नहीं होती, बनाई जाती है।’’
                     सिमोन द बउवार
सिमोन की इस पंक्ति से ही स्त्री विमर्श की आहट को पहचान लेना चाहिए। जो स्त्रियों को सदियों से घुटन भरे जीवन को जीने के लिए मजबूर कर रही है। पुरुष अपने मनमाने ढंग से स्त्री का शोषण कर रहा है। सुभद्रा जी ने इसी शोषण को मुद्दा बनाकर ‘स्त्री अस्मिता को जागरूक बनाने का बीड़ा उठाया और साहित्य के माध्यम से स्त्री शोषण के सभी मुद्दों को अपनी कहानी लेखन में स्थान दिया। यहाँ शोषण केवल पुरुष द्वारा ही नहीं किया जा रहा है, सुभद्रा जी ने स्त्री के प्रति स्त्री का शोषण जो उजाकर किया है, वह पीड़ा पहुँचाने वाला है। कहते हैं, महिलाओं के रिश्तों में छत्तीस के आँकड़े होते हैं अर्थात् दो महिलाओं के मध्य मानसिक भिन्नता और उदण्डता जैसे सास बहू का रिश्ता, नंद-भाभी का रिश्ता, देवरानी-जेठानी का रिश्ता इत्यादि। वर्चस्व की इस लड़ाई में महिला ही महिला की दुश्मन बनी जा रही है। स्वभावतः यह स्त्री विमर्श को कमजोर बनाता है।
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Pages:1-2
How to cite this article:
जयन्ती मिश्रा "समसामयिक दृष्टि से सुभद्रा कुमारी का स्त्री विमर्श". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 4, 2023, Pages 1-2
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