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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 5 (2023)
‘धरती हाँफ रही है’ में पर्यावरणीय चेतना
Authors
कुलदीप कौर
Abstract
समकालीन हिन्दी कविता सामाजिक यथार्थ की कविता है। यह कविता उन सभी सामाजिक प्रश्नों और मुद्धों के रू- ब- रू होती है जिनसे मानवीय समाज प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित और प्रभावित होता है। इस युग के कवि ने जहाँ सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विघटन को उभारा है वहाँ आधुनिक दौर को सबसे गंभीर समस्या पर्यावरण प्रदूषण को भी अभिव्यक्त किया है। विष्व स्तर पर इस समस्या के समाधान के लिए चिंतन हो रहा है। क्योंकि प्रकृति और मनुष्य का गहरा संबंध है। प्रकृति की गोद में ही व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास होता है। मानवीय जीवन के आधार पाँच तत्वों (पानी, मिट्टी, जल, वायु, आकाश) का निर्माण भी पर्यावरण में ही होता है। प्राकृतिक संवरा के संरक्षण के लिए चेतन कवि बलदेव वंशी की रचना धरती हाँफ रही है में पर्यावरीय चेतना को विश्लेषित करना ही प्रस्तुत शोध पत्र का लक्ष्य है।
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Pages:46-48
How to cite this article:
कुलदीप कौर "‘धरती हाँफ रही है’ में पर्यावरणीय चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 5, 2023, Pages 46-48
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