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VOL. 10, ISSUE 1 (2024)
राजेश जोशी के काव्य में मानवीय मूल्यों के विविध पक्ष
Authors
माने अनिल लक्ष्मण
Abstract
कवि राजेश जोशी अपने समय के बड़े कवि हैं उनकी कविताओं में मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति विविध संदर्भों में हमारे सामने प्रस्तुत होती हैं। कवि राजेश जोशी की कविताओं का वह दौर जहां वह अपने काव्य के माध्यम से बाजरवाद, राजनीति का अपराधीकरण तथा संवेदनहीनता जैसे मुद्दों पर गहन विचार दिखाई देते है। यह दौर राजेश जोशी की कविता ने परंपरा से अर्जित किया है। कवि राजेश जोशी की वह कविताएँ जो स्वाभाविक रूप से मनुष्य की बेहतरी के लिए उसके साथ खड़ी है। राजेश जोशी की कविता में विषयों की विविधता के कारण कोई मुख्य प्रवृति अभी तक नहीं पहचानी जा सकी है। बाजारवाद और भूमंडलीकरण ने एक तरह से पूरी सामाजिक सामाजिक संरचना को अव्यवस्थित कर दिया है जिसके कारण एक ही समय में अलग-अलग रंग के दृश्य उपस्थित हो रहें हैं। राजेश जोशी की कविताओं में स्त्री परंपरागत रूढ़ियों को और वर्जनाओं को तोड़ते हुए एक नए समाज का निर्माण कर रही हैं। जिसमें स्त्री को पुरुषवादी दृष्टिकोण से नहीं और न ही स्त्रीवादी दृष्टिकोण से जाँचा-परखा जाए इसके स्थान पर जाँच-परख का पैमाना मनुष्यता को बनाने का काम कवि करते हैं। सामंती एवं पूँजीवादी मूल्यों से ग्रसित शोषित एवं असंगठित समाज-व्यवस्था ने मनुष्यों को विवेक हीनता एवं चेतना विहीन बना दिया है। विकासशील देश भारत आज विष्व के विकसित देशों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। भारत सरकार ने देश के कोने-कोने में जनसाधारण के सर्वांगीण विकास हेतु योजना बनाई। किंतु प्रशासनिकों की स्वार्थलिप्सा ने इन योजनाओं को पूर्णतः कार्यान्वित न होने दिया। परिणामतः आज भी अनेक ऐसे गाँव हैं, जहाँ शिक्षा स्कूलों में नहीं बल्कि झूलाघर में दी जाती है। राजेश जोशी की कविता ‘खिलौना’ की कुछ पंग्तियां दृष्टव्य है-
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Pages:12-14
How to cite this article:
माने अनिल लक्ष्मण "राजेश जोशी के काव्य में मानवीय मूल्यों के विविध पक्ष". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 1, 2024, Pages 12-14
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