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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 10, ISSUE 1 (2024)
कबीर की काव्य रचनाओं में परमेश्वर का स्थान
Authors
सुमन रानी, मंजू
Abstract
कबीर ने परमेश्वर को सर्वव्यापक माना है। कबीर कहते हैं कि परमेश्वर को मिटाया नहीं जा सकता है। परमेश्वर सभी के दिलों में आत्मा के रूप में वास करते हैं। परमेश्वर व्यापक स्वरूप धारण करते हैं। परमेश्वर को अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग नाम से बुलाते हैं। उन्हें हिंदू धर्म में बहुदेव वाद बुलाते हैं परंतु और धर्म में एक परमेश्वर को माना गया है। परमेश्वर का कोई विशेष स्थान नहीं, कोई ठिकाना नहीं, परमेश्वर कोई व्यक्ति या वस्तु नहीं है। परमेश्वर से तात्पर्य सर्वस्व, संपूर्ण अस्तित्व।
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Pages:18-20
How to cite this article:
सुमन रानी, मंजू "कबीर की काव्य रचनाओं में परमेश्वर का स्थान". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 1, 2024, Pages 18-20
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