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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 10, ISSUE 2 (2024)
केदारनाथ अग्रवाल के काव्य में सामाजिक, राजनैतिक और मार्क्सवादी चेतना
Authors
बबली पण्डाग्रे
Abstract
आधुनिक काल के प्रगतिवादी कवि केदारनाथ जी अग्रवाल का काव्य जगत बहुत ही विराट और महान है। उनका कवि हृदय समाज की हर छोटी-बडी समस्या के प्रति संवेदनशील दिखाई देता है। प्रारंभ में वे एक रोमांटिक कवि थे लेकिन समय के साथ-साथ वे जनसामान्य से जुडते चले गए। केदारनाथ जी के काव्य मे भावभूमि और विचारभूमि के विभिन्न रुप देखने को मिलते है। राष्ट्र और समाज की व्यवस्था के प्रति उनका मोहभंग उनकी कविता में उभरकर सामने आया है। हिन्दी के प्रगतिवादी कवि केदारनाथ अग्रवाल यथार्थ जीवन के संघर्ष को सहजता से देखते है। केदारनाथ जी के काव्य में किसानो की दयनीय दशा, किसानो की गरीबी व बेरोजगारी का चित्र देखने को मिलता है। वे किसानो की दयनीय ंिस्थति के लिए पॅूजीपतियों, सूदखोरो, मिलमालिको और राजनेताओ को दोषी मानते है। कवि केदारनाथ जी ग्रामीण परिवेश के कवि है। लोकजीवन से उनका गहरा नाता है।वे स्वयं कहते है कि ‘‘मै गॉव का आदमी हॅू और शहर में रहते हुए भी मै अपने गॉव को नही भूल पाया हॅू। मेरी जडे आज भी गॉव में है। उनकी कविताओं में ग्रामीण परिवेश, किसानों का उल्लास-विषाद, राग-विराग की धडकनों को सुना जा सकता है। गॉव की नदी, तालाब, बाग-बगीचे, जंगल, पशु-पक्षी, पुल, गॉव की फसले, धूल आदि उनके जीवन के अंग बने रहे। जिसका प्रयोग वे अपनी कविताओं में बिम्बों और प्रतीकों के रुप मंे करते रहे। उनकी कविताओ में प्रकृति का अनूठा चित्रण देखने को मिलता है। केदारनाथ जी अपनी कविता मे राजनेताओ में व्याप्त भ्रष्टाचार का भी चित्रण करते है। वे अपने देश की आर्थिक स्थिति और्र आिर्थक दुर्दशा से भी दुखी दिखाई देते है। किसानो और शोषितों की आर्थिक बदहाली का चित्रण भी उनके काव्य में हुआ है। केदारनाथ अग्रवाल मार्क्सवादी-साम्यवादी विचारधारा के कवि है। उनकी कविता में नारी के प्रति भी सदभावना को व्यक्त किया गया है। वे नारी के प्रति समान अधिकार के पक्षधर है। अतः समाज में शोषक वर्ग और शोषित वर्ग के बीच की खाई को मिटाना ही शोध का प्रयोजन है।
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Pages:1-3
How to cite this article:
बबली पण्डाग्रे "केदारनाथ अग्रवाल के काव्य में सामाजिक, राजनैतिक और मार्क्सवादी चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 2, 2024, Pages 1-3
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