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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
प्रतिरोध की कविता और रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ की काव्य-चेतना
Authors
सुनील चौधरी
Abstract
इस शोध-पात्र के अंतर्गत रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ को जान्ने समझने के साथ ही यह प्रयास किया गया है कि उनके कृतित्व की परम्परा को समझने के साथ ही उनके मिजाज को जाना जाय । विद्रोही लगातार कोशिश करते रहे थे कि जहाँ भी कमी हो उसे सुधारने का प्रयास पूरी ताकत के साथ किया जाना चाहिए। वे आजीवन आन्दोलनों में शामिल होते रहे और मनुष्य के पक्ष में अपने बयान देते रहे। उनकी हस्तक्षेप करने की कोशिश ही उनको विद्रोही बनाती है और कमजोरों के पक्ष में फैसला सुनाती है। जिसके परिणाम जल्द ही बेशक न मिले हों लेकिन भवष्य को बेहतर बनाने के लिए आज को बेहतर बनाना बहुत आवश्यक है और रमाशंकर भी वही कार्य करते नजर आते हैं।
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Pages:1-4
How to cite this article:
सुनील चौधरी "प्रतिरोध की कविता और रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ की काव्य-चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 1-4
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