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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
इक्कीसवीं सदी के साहित्य में महिलाओं की भूमिका
Authors
डॉ. डी जयभारती
Abstract
21वीं सदी में हिंदी साहित्य का परिदृश्य उल्लेखनीय रूप से परिवर्तित हो चुका है, जिसमें महिला लेखकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इस सदी में महिला लेखक साहित्यिक क्षेत्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए विभिन्न मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। उनके लेखन में समाज के ज्वलंत विषय, जैसे लैंगिक भेदभाव, पितृसत्तात्मक संरचना, और महिला सशक्तिकरण प्रमुखता से दिखाई देते हैं। महिला लेखिकाएँ न केवल परंपरागत साहित्यिक रूपों को चुनौती दे रही हैं, बल्कि नई और प्रयोगात्मक लेखन शैली भी अपना रही हैं, जिससे हिंदी साहित्य को एक नई दिशा और ऊर्जा मिली है। महिला लेखिकाओं ने साहित्य के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया है और उनके विचारों ने सामाजिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इक्कीसवीं सदी में हिंदी साहित्य में महिला लेखिकाओं का योगदान अत्यधिक प्रभावशाली और नवाचारी रहा है। इस काल में, लेखिकाओं जैसे गीतांजलि श्री, मैत्रेयी पुष्पा, ममता कालिया, और कृष्णा सोबती ने अपने प्रयोगात्मक लेखन से साहित्य को नया आयाम दिया है। उन्होंने सामाजिक मुद्दों जैसे लिंग समानता, महिला सशक्तिकरण, और शिक्षा के महत्व को अपने लेखन में प्रमुखता से उठाया है। इन लेखिकाओं ने पारंपरिक लेखन ढाँचों को चुनौती दी और नई दृष्टिकोणों और शैलियों का प्रयोग किया है, जिससे हिंदी साहित्य को वैश्विक पहचान मिली है। उनकी रचनाओं में महिलाओं की सामाजिक स्थिति, व्यक्तिगत संघर्ष, और स्वतंत्रता की खोज को एक नई दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है। इन योगदानों ने न केवल साहित्य को समृद्ध किया है, बल्कि समाज में महत्वपूर्ण परिवर्तन और जागरूकता को भी प्रेरित किया है।
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Pages:16-17
How to cite this article:
डॉ. डी जयभारती "इक्कीसवीं सदी के साहित्य में महिलाओं की भूमिका". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 16-17
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