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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
विपश्यना की दृष्टि से ‘चतस्सो पटिसम्भिदा’ : एक संक्षिप्त विश्लेषण
Authors
प्रेम दत्त सिंह मेधंकर, सुभाष कुमार सिंह
Abstract
पटिसम्भिदा का अर्थ होता है ‘विभाजन या विश्लेषण द्वारा प्राप्त ज्ञान’। यह वह बौद्धिक क्षमता है जिससे व्यक्ति, विचारों, और सत्य को सूक्ष्मतम स्तर पर समझने में सक्षम होता है। इसका मुख्य उद्देश्य जीवन की वास्तविकता को समझना और संसार के कार्य-कारण संबंधों का गहन विश्लेषण करना है। पटिसम्भिदा एक साधक को अपने मानसिक और बौद्धिक ज्ञान को गहराई से समझने का मार्गदर्शन करता है। यह ज्ञान जीवन और सत्य की गहन व्याख्या में सहायक होता है। विपश्यना साधना के दौरान उत्पन्न होने वाले अनुभवों को समझने और उनके अर्थ की सही व्याख्या करने के लिए ये पटिसम्भिदा अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। पटिसम्भिदा बौद्ध दर्शन और साधना की एक गहन व्याख्या है, जो साधक को सत्य की गहरी समझ और उसकी व्याख्या करने की क्षमता प्रदान करता है। विपश्यना साधना के संदर्भ में, यह साधक को प्रत्येक अनुभव का सही अर्थ और मर्म समझने में सहायता करता है, जिससे वह मानसिक शुद्धि और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर हो सके। इसे चार प्रमुख प्रकारों में विभाजित किया गया है जो निम्नलिखित हैं-
1. अत्थ पटिसम्भिदा (अर्थ ज्ञान)
2. धम्म पटिसम्भिदा (धम्म का ज्ञान)
3. निरुत्ति पटिसम्भिदा (शब्द और भाषा का ज्ञान)
4. पटिभान पटिसम्भिदा (तत्काल बुद्धिमत्ता का ज्ञान)
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Pages:21-24
How to cite this article:
प्रेम दत्त सिंह मेधंकर, सुभाष कुमार सिंह "विपश्यना की दृष्टि से ‘चतस्सो पटिसम्भिदा’ : एक संक्षिप्त विश्लेषण". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 21-24
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