Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
राजस्थान लोकगीतों को प्रचारित करने वाले समुदाय: एक सामाजिक अध्ययन
Authors
रेश्मा निलंगेकर, शशिकला राय
Abstract
हमारा देश विशाल संस्कृतियों का मिला जुला रुप हैं । जिसमें विशाल जाति, जनजातियां शामिल हैं। उन जनजातियों ने अपनी लोक संस्कृति और लोक कला जीवित रखी हुई है। ये जनजातियां अपने लोककलाओं का प्रचार और प्रसार करते हुए संपूर्ण भारत में और विदेशों में भी दिखाई देते हैं। इन जनजातियों की कई पीढ़ियां हो चुकी है जो अपनी इन कलाओं को संजोए रखने में सक्षम हुई है। राजस्थान की भी कुछ ऐसी ही जनजातीय हैं जो अपनी लोककला के अंतर्गत लोकगीतों लोककथाओं लोकगाथाओं, लोकनाट्य आदि को जीवित रखने के लिए हमेशा प्रयत्न करती रही है। ये लोग अपने लोकगीतों से, लोकनाट्य से, लोकगाथाओं से लोगों का मनोरंजन करते हुए दिखाई देते हैं। शहरों की अपेक्षा ये गांव में अधिक देखने को मिलता है। अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजीवनी देने का काम ये जनजातीय बड़े बखूबी से निभा रही हैं।
Download
Pages:37-40
How to cite this article:
रेश्मा निलंगेकर, शशिकला राय "राजस्थान लोकगीतों को प्रचारित करने वाले समुदाय: एक सामाजिक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 37-40
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.