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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में नारी चेतना का गुणत्मक विश्लेशण
Authors
डॉ. विनीता रघुवंशी, रामेश्वर बरदानिया
Abstract
यह अध्ययन हिंदी साहित्य में कहानी संग्रहों के महत्व पर केंद्रित है, जो भारतीय समाज, संस्कृति और मानव अनुभवों के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं। पारंपरिक कहानी संग्रहों में नैतिक शिक्षा, पौराणिक कथाएँ और सामाजिक नीतियाँ प्रमुख होती हैं, जो समृद्ध सांस्कृतिक जागरूकता और सम्मान का विकास करती हैं। वहीं, आधुनिक कहानी संग्रहों में वर्तमान भारतीय जीवन की समस्याएँ, व्यक्तिगत संघर्ष और बदलती पहचानें दिखाई देती हैं, जिनमें राजनीति, पर्यावरणीय मुद्दे और सामाजिक-आर्थिक संघर्ष जैसे विषयों पर गहराई से विचार किया गया है। हिंदी साहित्य में मैत्रेयी पुष्पा का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जिन्होंने ग्रामीण और कस्बाई जीवन को जीवंत रूप से प्रस्तुत करते हुए नारी चेतना को एक सशक्त स्वर दिया। इस अध्ययन का उद्देश्य उनके कहनी संग्रह चिन्हार, गोमा हँसती है और ललमनियां के माध्यम से उनकी कहानियों में नारी चेतना का विश्लेषण करना है। शोध में पात्रों का विश्लेषण, विषयगत अध्ययन और कथा संरचना के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया है कि कैसे उनकी कहानियाँ समाज की वास्तविकताओं और नारी के संघर्षों को उजागर करती हैं। यह अध्ययन साहित्य और समाजशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करेगा, साथ ही नारीवादी साहित्य में उनकी भूमिका को रेखांकित करते हुए सामाजिक बदलाव के प्रभावी माध्यम के रूप में साहित्य की क्षमता को समझेगा।
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Pages:11-17
How to cite this article:
डॉ. विनीता रघुवंशी, रामेश्वर बरदानिया "मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में नारी चेतना का गुणत्मक विश्लेशण". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 11-17
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