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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
चित्रा मुद्गल के उपन्यासों में चित्रित नारी जीवन का समग्र अनुशीलन: एक गुणत्मक अवलोकन
Authors
डॉ. विनीता रघुवंशी, रामचन्द्र दांगी
Abstract
हिंदी उपन्यास भारतीय साहित्य का वह प्रमुख अंग हैं, जो देश की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक यात्रा को दर्शाते हैं। प्रारंभिक यथार्थवादी कथाओं से लेकर समकालीन जटिल कथानकों तक, उन्होंने भारतीय समाज के विविध अनुभवों को प्रस्तुत करते हुए साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। चित्रा मुद्गल समकालीन हिंदी साहित्य की एक अग्रणी लेखिका है, जिन्होंने अपने उपन्यासों में समाजवादियों, दलितों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को गहराई से उजागर किया है (चित्रा मुद्गलः मेरे साक्षात्कार, 2010)। उनके उपन्यास, जैसे एक ज़मीन अपनी, आवां और गिलिगडु, महिलाओं के संघर्ष, सामाजिक बाधाओं और पितृसत्तात्मक ढाँचों के बीच उनकी दृढ़ता को बखूबी चित्रित करते हैं।
इस अध्ययन में गुणात्मक अनुसंधान विधियों के माध्यम से चित्रा मुद्गल के उपन्यासों मे कथा और पात्रों का विश्लेषण करते हुए महिलाओं के अनुभवों की जटिलताओं का अध्ययन किया गया है। साथ ही, उनके उपन्यासों में नारी जीवन के विषय, प्रतीकात्मकता और आलोचनात्मक दृष्टिकोण पर भी विचार किया गया है। शोध से यह स्पष्ट होता है कि मुद्गल की कथा शैली और विषयगत दृष्टिकोण सामाजिक यथार्थवाद के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। यह अध्ययन उनके साहित्य में महिलाओं के आत्मनिर्णय, संघर्ष और स्वायत्तता की गहराई को उजागर करता है, जिससे लिंग और अंतर्संबंधिता पर साहित्यिक विमर्श को एक नई दिशा मिलती है।
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Pages:18-22
How to cite this article:
डॉ. विनीता रघुवंशी, रामचन्द्र दांगी "चित्रा मुद्गल के उपन्यासों में चित्रित नारी जीवन का समग्र अनुशीलन: एक गुणत्मक अवलोकन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 18-22
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