ARCHIVES
VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
भारतीय संस्कृति के प्रहरी: मिथक
Authors
डॉ. सरिता चौहान
Abstract
प्रत्येक देश की संस्कृति उसके मिथकों में सुरक्षित रहती है। अपने सरलतम रूप में मिथक एक ऐसी कथा है जिसमें लौकिक एवं अलौकिक तत्त्वों का सम्मिश्रण है। यथार्थ के धरातल पर जो कुछ असम्भव लगता है मिथकों के संसार में प्रवेश करते ही वह सम्भव हो जाता है। भाषा एवं साहित्य के विकास में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान है। लोक मंगल के उदात्त आदर्शों को लेकर चलते, अनाचार पर अंकुश लगाते तथा एक सभ्य समाज की स्थापना करते मिथक हर युग में प्रासंगिक रहे हैं। मिथकों के माध्यम से हम अपनी संस्कृति को सहेजते एवं पोषित करते हैं। समाज के बिखराव, उदासीनता, अनाचार आदि पर अनुशासन का अंकुश लगाकर मिथक स्वस्थ समाज की स्थापना में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। यदि हम भारतीय संस्कृति एवं चिन्तन के अविरल प्रवाह पर ध्यान दें तो हम पाऐंगे कि प्राक् ऐतिहासिक काल से संस्कृति, चिन्तन, परम्पराओं तथा धार्मिक मान्यताओं को सुरक्षित करने का कार्य मिथक कर रहे हैं।
Download
Pages:35-38
How to cite this article:
डॉ. सरिता चौहान "भारतीय संस्कृति के प्रहरी: मिथक". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 35-38
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

