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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
प्रसाद के काव्यशास्त्र में मूल्यपरक चेतनाः एक तुलनात्मक अध्ययन
Authors
ज्योत्स्ना, मिथिलेश दीक्षित
Abstract
प्रसाद का काव्यशास्त्र भारतीय काव्य परंपरा में छायावाद के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में उभरता है। उनके काव्य में मूल्यपरक चेतना का गहरा स्थान है, जो जीवन, प्रेम, नैतिकता, धर्म और समाज के आदर्शों का विश्लेषण करती है। यह शोधपत्र प्रसाद की काव्यशास्त्र में निहित मूल्यपरक चेतना का तुलनात्मक अध्ययन करता है, विशेष रूप से उनके काव्य के माध्यम से व्यक्त की गई मानवता और आदर्शों की खोज को निराला, महादेवी वर्मा और पंत जैसे समकालीन छायावादी कवियों से तुलना करते हुए। प्रसाद के काव्य में मूल्य-निर्माण की प्रक्रिया और उनके द्वारा मानव जीवन के संघर्षों, आस्थाओं और समाज के नैतिक पहलुओं पर की गई गहरी छानबीन को प्रमुखता से उजागर किया गया है। यह अध्ययन यह दर्शाता है कि प्रसाद ने अपने काव्य में केवल व्यक्तिगत भावनाओं और मानसिक द्वंद्वों का चित्रण नहीं किया, बल्कि उन्होंने समाज के विकास, नैतिकता, और आदर्शों को भी प्राथमिकता दी। इस शोधपत्र का उद्देश्य प्रसाद की काव्यशास्त्र को समझने के साथ-साथ उसे अन्य छायावादी कवियों से तुलनात्मक दृष्टिकोण से परखना है।
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Pages:39-40
How to cite this article:
ज्योत्स्ना, मिथिलेश दीक्षित "प्रसाद के काव्यशास्त्र में मूल्यपरक चेतनाः एक तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 39-40
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