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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में नारी चेतना के घटकों का मात्रात्मक परीक्षणः पहचान, जागरूकता और आत्ममूल्यांकन
Authors
डॉ. विनीता रघुवंशी, रामेष्वर बरदानिया
Abstract
यह अध्ययन मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में नारी चेतना के चित्रण का मात्रात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें नारी चेतना के तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है- पहचान, जागरूकता और आत्म-मूल्यांकन। जहाँ नारीवादी साहित्यिक आलोचना ने इन विषयों का गुणात्मक रूप से गहन विश्लेषण किया है, यह शोध नारी प्रतिनिधित्व को समझने के लिए एक संरचित अनुभवजन्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। प्रस्तुत अध्ययन में मैत्रेयी पुष्पा के दो प्रसिद्ध कहानी संग्रहों, “चिन्हार” और “ललमनियाँ”, की छह कहानियों का विश्लेषण किया गया है। एक संरचित सर्वेक्षण द्वारा 10 अंकों की स्केल पर 162 प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाओं को अभिलिखित किया गया। तत्पश्चत इन प्रतिक्रियाओं पर एक-नमूना ज-परीक्षण किया गया। एक-नमूना ज-परीक्षण के परिणामों ने परिकल्पित माध्य से महत्वपूर्ण विचलन दिखायारू पहचान ने महत्वपूर्ण रूप से अधिक अंक प्राप्त किए (t = 8-51, p < 0.001), जो व्यक्तित्व की मजबूत अभिव्यक्ति को दर्शाता है; जागरूकता कम थी (t = -7.87, p < 0.001), जो समाजिक स्वीकृति के लिए संघर्ष को दर्शाती है; और आत्म-मूल्यांकन में कोई महत्वपूर्ण विचलन नहीं था (t =1-39, p=0.167), जो आंतरिक समाजिक प्रतिबंधों का संकेत है। इस नारीवादी साहित्यिक अध्ययन में मात्रात्मक विश्लेषण को शामिल करके यह बताने का प्रयास किया गया है कि सांख्यिकीय विधियाँ जैसे सर्वेक्षण-आधारित मूल्यांकन और ज-परीक्षण से साहित्य का अध्ययन किया जा सकता है। यह मैत्रेयी पुष्पा की रचनाओं में नरी की आत्म-चेतना और समाजिक भूमिकाओं के चित्रण के ठोस प्रमाण प्रदान करता है, जिससे यह पता चलता है कि महिलाएं अपनी पहचान को तो प्रकट करती हैं, लेकिन समाजिक स्थिति के प्रति उनकी जागरूकता सीमित रहती है। यह शोध नारीवादी साहित्यिक आलोचना में भविष्य के अनुभवजन्य अध्ययन को प्रोत्साहित करता है, जो लिंग सम्बंधित विमर्श की विष्वसनीयता और दायरे को बढ़ाते है।
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Pages:60-64
How to cite this article:
डॉ. विनीता रघुवंशी, रामेष्वर बरदानिया "मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में नारी चेतना के घटकों का मात्रात्मक परीक्षणः पहचान, जागरूकता और आत्ममूल्यांकन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 60-64
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