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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
समकालीन कथा साहित्य में विज्ञान कथा लेखन के विकास का अध्ययन
Authors
कविता लिटौरिया, डॉ. के. सी. जैन
Abstract
हिन्दी साहित्य में काव्य के विकास के पश्चात् गद्य का चहंुमुखी विकास देखनें को मिलता है। यह गद्य साहित्य की विभिन्न विधाओं में देखने को मिलता है। नाटक का विकास हो या एकांकी का विकास उपन्यास का विकास हो या कहानी का लगभग सभी विधाओं में जीवन के विभिन्न पहलुओं पर साहित्यकारों की पैनी नजर दिखाई पड़ती है। चाहे वह ग्राम्य जीवन हो, नगरीय जीवन हो, नारी अथवा स्त्री विमर्ष हो, दलित विमर्ष हो, किन्नर विमर्ष हो या पर्यावरण विमर्ष हो। सभी के विषय में गंभीरता से सोचा एवं लिखा गया। परन्तु इन सभी के लेखन के तले विज्ञान लेखन कहीं पीछे छूट गया। वैज्ञानिक विमर्ष अथवा विज्ञान साहित्य की अवधारणा कहीं बहुत पीछे छूट गई। इसका यह आषय नहीं है कि विज्ञान लेखन नहीं हुआ, विज्ञान लेखन हुआ तो है परन्तु उसे साहित्य में जो स्थान मिलना चाहिए वह अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। कई विद्वान एवं आलोचक तो अभी भी विज्ञान लेखन अथवा विज्ञान साहित्य को साहित्य की श्रेणी में न रखकर केवल विज्ञान आलेख अथवा फंतासी लेखन के अंतर्गत मानते आये है। इस कारण से विज्ञान कथाओं, उपन्यासों अथवा नाटकों को साहित्य में एक सकारात्मकता के साथ स्वीकार नहीं किया जा सका है।
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Pages:57-59
How to cite this article:
कविता लिटौरिया, डॉ. के. सी. जैन "समकालीन कथा साहित्य में विज्ञान कथा लेखन के विकास का अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 57-59
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