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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में नारी संघर्ष
Authors
पॉली भौमिक
Abstract
मैत्रेयी पुष्पा बीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक की प्रमुख कथाकारा है। उनकी कहानियाँ स्त्री के खंडित जीवन, कुंठा के परिणामस्वरूप बिखरते रिश्ते, समाज और परिवार में स्त्री की भूमिका इत्यादि को प्रस्तुत करती है। मैत्रेयी पुष्पा के कहानियों की नारियाँ परंपरागत बंधनों, कुंठा, अंधविश्वास को त्यागकर नवीन चेतना के साथ सामने आती है। मैत्रेयी पुष्पा ने जीवन की जिस पीड़ा को भोगा है, जिया है उसी का यथार्थ चित्रण अपनी कहानियों में किया है। समय में परिवर्तन के साथ- साथ नारियों में भी सकारात्मक परिवर्तन हो रहे है जिसका यथार्थ वर्णन कहानियों में मिलता है। उनकी कहानियाँ जीवन की नई भावबोध को अभिव्यक्त करती है। उनकी कहानियों में न केवल उन नारी पात्रों का चित्रण मिलता है जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रही है बल्कि उन नारी पात्रों को भी उठाया गया है जो हाशिये में कर दी गई है और उन्हे मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया गया है। उनकी कहानियों में उन नारी चरित्र के वर्णन मिलते है जिन्हें केवल अधिकारों से ही वंचित नहीं रखा गया बल्कि चेतना होने के अवसरों से भी दूर रखा गया है। मैत्रेयी पुष्पा अपनी रचनाओं के द्वारा कथागत तथा शिल्पगत रूढ़ियों को तोड़ती हुई एक विश्लेषक के रूप में सामने आई है।
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Pages:34-37
How to cite this article:
पॉली भौमिक "मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में नारी संघर्ष". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 34-37
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