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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
किसान जीवन का यथार्थ चित्रणः साहित्य की दृष्टि से
Authors
डॉ. सरोजनी कोशले
Abstract
किसान जीवन, साहित्य की दृष्टि से देखा जाए तो एक यथार्थवादी और जटिल विषय है। यह किसान जीवन संघर्ष और गरीबी से तो जुड़ा ही है। साथ सामाजिक - आर्थिक असमानता से जुड़ते हुए प्रकृति से जुड़ाव और जीवन की आशावादिता का एक मिश्रण है। साहित्य में किसान जीवन का चित्रण अक्सर ग्रामीण परिवेश, कृषि कार्य, सामाजिक व्यवस्था के साथ किसान तथा उसके पारिवारिक रहन सहन, खान-पान व्यवहार आदि की प्रतिक्रिया को दर्शाता है। साहित्य के माध्यम से किसान जीवन को समझना सुविधा पूर्वक होता है। भारत किसान प्रधान देश होने के बावजूद भी किसानों के निजि जीवन के लिए तथा उसके अंतःद्वन्द्व भावना को समझने के लिए साहित्य एक सशक्त माध्यम है। किसान कथा से किसान के सोच विचार उसकी आवश्यकता आदि को लेखक के माध्यम से रूचिपूर्वक रचनाकर कर साहित्य का सहारा लेकर समाज के सामने प्रस्तुत करता है।
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Pages:65-66
How to cite this article:
डॉ. सरोजनी कोशले "किसान जीवन का यथार्थ चित्रणः साहित्य की दृष्टि से". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 65-66
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