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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 2 (2025)
पारंपरिक भारतीय मानसून पूर्वानुमान प्रथाओं से प्राप्त अन्तर्दृष्टि
Authors
डॉ. कुमुद पुरोहित
Abstract
भारतीय ज्ञान परम्परा में ज्ञान, विज्ञान और जीवन दर्शन शामिल हैं जो अनुभव, अवलोकन, प्रयोग और गहन विश्लेषण से विकसित हुए हैं । भारत जैसे कृषि प्रधान देश में, मानसून की भविष्यवाणी करना महत्वपूर्ण है। पारंपरिक भारतीय ज्ञान विरासत में प्रकृति के गहन अवलोकन पर आधारित भारतीय विद्वानों के विद्वतापूर्ण ग्रंथ और लोक ज्ञान दोनों शामिल हैं। यह आलेख मानसून की भविष्यवाणी के महत्वपूर्ण प्राकृतिक, जैविक और लोक संकेतकों (जानवरों के व्यवहार, बादल निर्माण, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्रों और पौधों की प्रतिक्रियाओं जैसे प्राकृतिक संकेतकों के सदियों पुराने अवलोकनों पर आधारित है, जो वराहमिहिर द्वारा बृहत् संहिता, पाणिनि द्वारा अष्टाध्यायी और मेघमाला जैसे बौद्धिक ग्रंथों और गुजराती में भडली वाक्यो, मराठी में सहदेव भडली, राजस्थान में बुजुर्गों की कहावतों ) जैसे अवलोकन अनुभव जनित सहज ज्ञान अधारित मौखिक लोकसाहित्यपर चर्चा करता है।
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Pages:70-73
How to cite this article:
डॉ. कुमुद पुरोहित "पारंपरिक भारतीय मानसून पूर्वानुमान प्रथाओं से प्राप्त अन्तर्दृष्टि". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 2, 2025, Pages 70-73
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