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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
एक जीवन दर्शन और व्यक्तित्व विकास की संहितार: रामचरितमानस
Authors
SVSS Narayana Raju
Abstract
एक जीवनदर्शन और व्यक्तित्व विकास की संहिता रू रामचरितमानस” आलेख में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि श्रीरामचरितमानस मात्र एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि वह भारतीय जीवन-दर्शन, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व निर्माण का समग्र शास्त्र भी है. आज के तनावग्रस्त और भागदौड़ भरे जीवन में जब व्यक्ति मानसिक दबाव से ग्रस्त रहता है, तब यह ग्रंथ व्यवहारिक दृष्टिकोण, नैतिक अनुशासन और आंतरिक संतुलन का मार्ग प्रशस्त करता है. इस आलेख में विशेष रूप से सुंदरकांड के माध्यम से श्रीहनुमान जी के चरित्र का विश्लेषण करते हुए यह प्रतिपादित किया गया है कि अपने कार्य के प्रति समर्पण, परिस्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देना, संयमित व्यवहार रखना और सत्यनिष्ठा जैसे गुण कैसे तनाव मुक्ति और व्यक्तित्व विकास में सहायक होते हैं. साथ ही, यह आलेख बताता है कि झूठ बोलने जैसी साधारण आदतें भी कैसे हमारे मानसिक ढाँचे को प्रभावित करती हैं और उनसे मुक्ति कैसे पाई जा सकती है. 
रामचरितमानस के प्रसंगों, जैसे सुरसा, लंकिनी, विभीषण के संवाद के माध्यम से यह आलेख जीवन की जटिलताओं से जूझने की आंतरिक क्षमता को जाग्रत करने का संदेश देता है. अंततः यह लेख इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि रामचरितमानस को केवल धार्मिक संदर्भों में न रखकर, जीवन-शिक्षा और व्यक्तित्व परिष्कार के संदर्भ में अपनाया जाना ही वर्तमान समय की मांग है.

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Pages:11-13
How to cite this article:
SVSS Narayana Raju "एक जीवन दर्शन और व्यक्तित्व विकास की संहितार: रामचरितमानस". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 11-13
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