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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
12वीं शताब्दी का वचन साहित्य और सामाजिक सुधार पर उसका प्रभाव
Authors
डॉ. सैयद मुईन
Abstract
वचन साहित्य कर्नाटक की 12वीं शताब्दी में उद्भूत एक क्रांतिकारी साहित्यिक परंपरा है, जिसने न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक चेतना को नई दिशा दी, बल्कि जाति–आधारित असमानता, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक शोषण के विरुद्ध एक शक्तिशाली सामाजिक आंदोलन को जन्म दिया। बसवन्ना, अल्लमा प्रभु और अक्का महादेवी जैसे वचनकारों ने सरल कन्नड़ भाषा में रचित वचनों के माध्यम से समाज के सभी वर्गों तक समानता, न्याय और भक्तिमार्ग की शिक्षा पहुँचाई। यह शोध–लेख वचन साहित्य की उत्पत्ति, उसकी साहित्यिक विशेषताओं, सामाजिक सुधार में उसकी भूमिका और आज के समय में उसकी प्रासंगिकता का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
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Pages:103-106
How to cite this article:
डॉ. सैयद मुईन "12वीं शताब्दी का वचन साहित्य और सामाजिक सुधार पर उसका प्रभाव". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 103-106
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