Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
समसामयिक दलित जीवनवृत्तांत एवं कथाएँ
Authors
हंसराज, डॉ. अशोक धारनिया
Abstract
हिंदी दलित साहित्य की वर्तमान प्रवृत्तियों में वैचारिक आधारभूमि और सामाजिक प्रभाव का विशद विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। समकालीन दलित जीवनवृत्तांत और कथाएँ केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध और आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना का सशक्त माध्यम हैं। इन रचनाओं की वैचारिक पृष्ठभूमि पर भीमराव आंबेडकर के समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों का गहरा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है, जिसने दलित लेखन को संघर्षशील चेतना और वैचारिक स्पष्टता प्रदान की। समकालीन दलित जीवनवृत्तांतों को व्यक्तिगत होते हुए भी सामूहिक सामाजिक इतिहास का दस्तावेज माना गया है। इसी प्रकार दलित कथाओं में जातिगत उत्पीड़न, सामाजिक बहिष्कार, शिक्षा-संघर्ष, आत्मगौरव और परिवर्तन की आकांक्षा जैसे विषयों की उपस्थिति का विश्लेषण किया गया है। दलित स्त्री लेखन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, जहाँ जाति और लिंग के दोहरे शोषण की अभिव्यक्ति स्पष्ट रूप से सामने आती है। समसामयिक दलित कथाएँ ग्रामीण और शहरी दोनों परिवेशों में फैले भेदभाव, पहचान-संकट तथा सामाजिक असमानताओं को उजागर करती हैं। साथ ही, डिजिटल माध्यमों और नए संचार-साधनों के प्रभाव से दलित लेखन के प्रसार और लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया पर भी विचार किया गया है। समकालीन दलित जीवनवृत्तांत एवं कथाएँ हिंदी साहित्य को नई वैचारिक दिशा प्रदान कर रही हैं। ये रचनाएँ केवल पीड़ा का आख्यान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, समानता और मानवीय गरिमा की स्थापना का घोषणापत्र हैं। इस प्रकार यह साहित्य भारतीय समाज में लोकतांत्रिक मूल्यों की सुदृढ़ स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

Download
Pages:115-116
How to cite this article:
हंसराज, डॉ. अशोक धारनिया "समसामयिक दलित जीवनवृत्तांत एवं कथाएँ". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 115-116
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.