Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
शिक्षाशास्त्र और अर्थशास्त्र: सिद्धांत और व्यावहारिक चुनौतियों और संभावनाओं का विश्लेषण
Authors
आराधना सिंह
Abstract
अर्थशास्त्र एक ऐसा विषय है जो मानव जीवन के प्रत्येक पहलू से जुड़ा है — घर की बजट से लेकर वैश्विक मंदी तक। फिर भी, इस विषय को पढ़ाने का तरीका अक्सर इतना सैद्धांतिक और जटिल हो जाता है कि छात्र इसे अपने वास्तविक जीवन से नहीं जोड़ पाते। यह शोधपत्र शिक्षाशास्त्र (Pedagogy) और अर्थशास्त्र शिक्षा के बीच के संबंध की गहन पड़ताल करता है। मुख्य प्रश्न यह है: क्या हम अर्थशास्त्र को इस तरह पढ़ा सकते हैं कि छात्र न केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाएँ, बल्कि महँगाई, बेरोज़गारी, बैंकिंग और सरकारी नीतियों को भी समझ सकें? इस अध्ययन में रचनावाद (Constructivism), अनुभव-आधारित शिक्षा (Experiential Learning), समस्या-आधारित शिक्षण (Problem-Based Learning) और आलोचनात्मक शिक्षाशास्त्र (Critical Pedagogy) जैसे प्रमुख शैक्षिक सिद्धांतों का विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही, भारतीय शिक्षा व्यवस्था में — विशेष रूप से माध्यमिक और उच्च शिक्षा स्तर पर — रटन्त प्रणाली की समस्या और उसके विकल्पों पर भी विचार किया गया है। साहित्य समीक्षा और विश्लेषणात्मक अध्ययन के आधार पर यह शोधपत्र शिक्षकों और नीति-निर्माताओं के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करता है। निष्कर्ष यह है कि यदि शिक्षक-केंद्रित शिक्षण को छात्र-केंद्रित और संदर्भ-समृद्ध शिक्षण पद्धति से बदला जाए, तो अर्थशास्त्र की शिक्षा अधिक सार्थक, प्रभावी और जीवनोपयोगी बन सकती है।
Download
Pages:117-119
How to cite this article:
आराधना सिंह "शिक्षाशास्त्र और अर्थशास्त्र: सिद्धांत और व्यावहारिक चुनौतियों और संभावनाओं का विश्लेषण". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 117-119

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.