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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
डॉ. विजय कुमार संदेश के काव्य में प्रकृति-चित्रण
Authors
डॉ. संतोष गायकवाड़
Abstract
डॉ. संदेश का प्रकृति के साथ गहरा करुणामय संबंध है - वे उसे केवल देखते ही नहीं, जीते भी हैं। प्रकृति को गहराई से अनुभव करते हैं और उसे मानवीय चेतना से जोड़ते हैं। उनकी कविताओं में प्रकृति और मानवीय भावनाएँ एक-दूसरे में विलीन हो जाती हैं। यह संवेदनशीलता कवि की आंतरिक करुणा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। कवि की आंतरिक संवेदनशीलता प्रकृति में प्रवाहित होती है। उनके लिए, प्रकृति एक ऐसा माध्यम है जो मानवता के आंतरिक दुःख, प्रेम, अकेलेपन और संघर्ष को शांत करती है। डॉ. संदेश की कविताओं में प्रकृति के प्रति न केवल भावनात्मक, बल्कि नैतिक और सामाजिक संवेदनशीलता भी झलकती है। बढ़ते प्राकृतिक विनाश, प्रदूषण और मानवीय स्वार्थ के इस दौर में, उनका काव्य हृदय व्यथित है। वे प्रकृति को एक माँ या एक सहजीवी के रूप में देखते हैं जिसे सम्मान और संरक्षण की आवश्यकता है। उनकी संवेदनशीलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे प्रकृति को केवल सौंदर्य ही नहीं, बल्कि जीवन का आधार भी मानते हैं।
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Pages:55-57
How to cite this article:
डॉ. संतोष गायकवाड़ "डॉ. विजय कुमार संदेश के काव्य में प्रकृति-चित्रण". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 55-57
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