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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
अभिमन्यु अनत की कहानियों में व्यक्त गिरमिटिया समुदाय की पीड़ा और संघर्ष
Authors
ज्योति झा
Abstract
मॉरीशस के प्रवासी साहित्यकारों में अभिमन्यु अनत का महत्वपूर्ण स्थान है। इनके साहित्य में प्रवासी गिरमिटिया समुदाय के जीवन संघर्ष, आशा – निराशा, अपनी अस्मिता के लिए संघर्ष, अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को बचाए रखने के लिए संघर्ष आदि की मुखर अभिव्यक्ति हुई है। अभिमन्यु अनत का साहित्य भारत और मॉरीशस के संबंधों को जोड़ने के लिए एक पुल का काम करता है। उन्होंने अपनी कृतियों के द्वारा भारत से साहित्यिक - सांस्कृतिक संबंध को मजबूत बनाने में अधिक बल दिया है। जिससे भारत और मॉरीशस के बीच सामाजिक और राजनीतिक संबंधों में मजबूती आई है। मॉरीशस में भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को मजबूती से स्थापित करने में अभिमन्यु अनत का महत्वपूर्ण योगदान है। यदि यह कहा जाए कि मॉरीशस के हिंदी साहित्य में अनत जी का एक संपूर्ण युग है, तो गलत नहीं होगा।
अभिमन्यु अनत के विपुल साहित्य में प्रवासी भारतीयों के जीवन संघर्ष के विविध पक्षों की अभिव्यक्ति हुई है। जिसमें गोरे मालिकों के बागानों में दासों की तरह शोषण तथा उनके अत्याचारों को सहते, गिरमिटिया मज़दूरों की दयनीय स्थिति का सजीव चित्रण इनके साहित्य में देखने को मिलता है। खेत - खलिहान में दिन- रात परिश्रम करते इस समुदाय के लोगों की हताशा- निराशा आदि की मुखर अभिव्यक्ति इनके साहित्य में हुई है। इनकी कहानियों में आधुनिक जीवन की जटिलताएं तथा उनसे आने वाले सामाजिक परिवर्तनों और उससे उत्पन्न समस्याओं का चित्रण हुआ है, साथ ही यूरोपीय सभ्यता तथा संस्कृति के समक्ष वे भारतीय सभ्यता और संस्कृति को रखते हैं। वे अपनी रचनाओं द्वारा
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Pages:106-109
How to cite this article:
ज्योति झा "अभिमन्यु अनत की कहानियों में व्यक्त गिरमिटिया समुदाय की पीड़ा और संघर्ष". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 106-109
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