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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
महाश्वेता देवी की ‘स्तनादायिनी’ - साहित्यिक विश्लेशण
Authors
डॉ. सैयद मुईन
Abstract
महाश्वेता देवी का उपन्यास “स्तनदायिनी” भारतीय समाज की जाति, वर्ग, और स्त्री शोषण की गहराइयों को उजागर करता है। यह कहानी केवल एक स्त्री की नहीं, बल्कि पूरे समाज की असमानता, नैतिक पतन और पितृसत्ता के विरोध का प्रतीक है। उपन्यास की नायिका जशोदा , जो एक दाई के रूप में पूरे परिवार को पालती है, अंततः उसी व्यवस्था की शिकार बन जाती है जिसके लिए उसने अपना जीवन समर्पित किया। यह शोध लेख महाश्वेता देवी के लेखन में स्त्री की पीड़ा, वर्ग-संघर्ष, और सामाजिक यथार्थ की पड़ताल करता है।
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Pages:130-133
How to cite this article:
डॉ. सैयद मुईन "महाश्वेता देवी की ‘स्तनादायिनी’ - साहित्यिक विश्लेशण". International Journal of Hindi Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 130-133
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