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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
पूर्वोत्तर भारत में ताई समुदाय का अस्तित्व
Authors
चान्दम ओकेनजित सिंह
Abstract
ताई लोग मंगोलोइड मूल का एक जातीय समूह हैं, जो दक्षिणी चीन के यूनान क्षेत्र से निकलकर लाओस, वियतनाम, म्यांमार, थाईलैंड और भारत तक फैले हुए हैं। वे ताई-कादाई भाषा बोलते हैं और अपने पूर्वजों की पूजा तथा पारिवारिक मूल्यों को महत्व देते हैं। ताई समाज सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है और यह समुदाय धान की खेती करने वालों में सबसे प्राचीन माना जाता है। इसलिए वे प्रायः बड़ी नदियों की घाटियों में बसते हैं जैसे– मेकोंग, सालविन, इरावदी और ब्रह्मपुत्र। पूर्वोत्तर भारत आठ राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम,नागालैंड,त्रिपुरा,सिक्किम) का समूह है, जिसे "आठ भाई-बहन" या अष्ठलक्ष्मी कहा जाता है। यह क्षेत्र भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यहाँ अनेक जनजातियाँ अपनी अलग भाषाओं, रीति-रिवाजों और परंपराओँ को मानते चले आ रहे हैं। पूर्वी हिमालय और पटकाई-नागा पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता से भरपूर है और भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाला प्रमुख द्वार है। प्रस्तुत आलेख में पूर्वोत्तर राज्यों में निवास करने वाले ‘ताई’ समुदायों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है|
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Pages:30-32
How to cite this article:
चान्दम ओकेनजित सिंह "पूर्वोत्तर भारत में ताई समुदाय का अस्तित्व". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 30-32
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