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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
“एक मंत्री स्वर्गलोक में”: डॉ. शंकर पुणतांबेकर का व्यंग्यात्मक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य
Authors
डॉ. सैयद मुईन
Abstract
डॉ. शंकर पुणतांबेकर का उपन्यास “एक मंत्री स्वर्गलोक में” भारतीय समाज, राजनीति और नैतिक पतन पर गहरा व्यंग्य है। इस उपन्यास में लेखक ने राजनीतिक पाखंड, सत्ता की लालसा और मानवता के ह्रास को हास्य और व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया है। यह कृति आधुनिक भारतीय शासन व्यवस्था की विडंबनाओं का दर्पण है, जहाँ स्वर्गलोक का प्रतीक धरती के समाज की असलियत को उघाड़ देता है। यह लेख इस उपन्यास का सामाजिक, दार्शनिक और नाट्य दृष्टि से विश्लेषण करता है तथा इसे भारतीय व्यंग्य साहित्य की परंपरा में रखकर उसका मूल्यांकन करता है।
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Pages:24-26
How to cite this article:
डॉ. सैयद मुईन "“एक मंत्री स्वर्गलोक में”: डॉ. शंकर पुणतांबेकर का व्यंग्यात्मक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 24-26
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