Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
चित्रा मुद्गल के उपन्यास साहित्य में वर्णित नारी
Authors
अमित पटेल
Abstract
हिन्दी कथा साहित्य में चित्रा मुद्गल का रचनात्मक योगदान विशेष रूप से नारी जीवन के संघर्ष, पीड़ा, अस्मिता और आत्मनिर्भरता के यथार्थ चित्रण के लिए उल्लेखनीय है। उनका साहित्य नारी जागरण की चेतना से अनुप्राणित है, जहाँ स्त्री को केवल करुणा की पात्र न बनाकर संघर्षशील, सजग और आत्मसम्मान के प्रति सचेत व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है। चित्रा मुद्गल ने पितृसत्तात्मक समाज, सामंती मूल्यों, पूँजीवादी व्यवस्था तथा भूमंडलीकरण और बाजारवाद के प्रभाव में बदलते स्त्री जीवन की जटिलताओं को अपने उपन्यासों के माध्यम से सशक्त अभिव्यक्ति दी है।
‘एक जमीन अपनी’, ‘आवां’, ‘गिलिगडु’ आदि उपन्यासों में विज्ञापन, मॉडलिंग, पत्रकारिता जैसे आधुनिक क्षेत्रों में कार्यरत स्त्रियों के माध्यम से उन्होंने नारी देह के बाजारीकरण, शोषण के नए रूपों तथा नैतिक द्वंद्वों को उजागर किया है। साथ ही उनके नारी पात्र आर्थिक आत्मनिर्भरता, प्रेम में विफलता, सामाजिक रूढ़ियों के विरोध और व्यक्तिगत निर्णयों के माध्यम से अपनी अस्मिता की रक्षा करते दिखाई देते हैं। चित्रा मुद्गल का साहित्य नारीवाद के कट्टर आग्रह से अलग मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाते हुए स्त्री-पुरुष के सामंजस्य, मानवीय मूल्यों और सामाजिक यथार्थ को रेखांकित करता है। इस प्रकार उनका कथा साहित्य समकालीन भारतीय समाज में नारी जीवन की दशा और दिशा का प्रामाणिक दस्तावेज है।
Download
Pages:69-71
How to cite this article:
अमित पटेल "चित्रा मुद्गल के उपन्यास साहित्य में वर्णित नारी". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 69-71
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.