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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
21वीं सदी की कविता में गाँव और किसान जीवन एक सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श
Authors
किरण बाला
Abstract
यह शोध-पत्र 21वीं सदी की हिंदी कविता में गाँव और किसान जीवन के चित्रण का विश्लेषण करता है। समकालीन कविताओं में ग्रामीण परिवेश, कृषि संकट, किसान की पीड़ा, पलायन, और बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को संवेदनशील रूप से अभिव्यक्त किया गया है। कविता में गाँव केवल भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और मानवीय मूल्यों का प्रतीक बनकर उभरता है। किसान जीवन से जुड़े संघर्ष, आशा, निराशा और आत्मसम्मान को कवियों ने यथार्थवादी दृष्टि से प्रस्तुत किया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि 21वीं सदी की कविता गाँव और किसान की समस्याओं को उजागर करते हुए सामाजिक चेतना को मजबूत करती है तथा ग्रामीण जीवन को समकालीन विमर्श के केंद्र में स्थापित करती है।
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Pages:181-183
How to cite this article:
किरण बाला "21वीं सदी की कविता में गाँव और किसान जीवन एक सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 181-183
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