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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
नारी पात्रों का अनुशीलन अल्पना मिश्र की रचनाओं में
Authors
Shraddha Dharmkumar singh Bhadauria, Dr. Sharankhala
Abstract
अल्पना मिश्र आधुनिक हिंदी साहित्य में एक बेहद संवेदनशील कहानीकार के तौर पर जानी जाती है। इस लेख के द्वारा उनकी रचनाओं में नारी पात्रों के अनुशीलन के बारे में जानने की कोशिश करेंगे। उनकी ज्यादातर कहानियों में नारी जीवन की आंतरिक समस्याएं, आत्मचेतना एवं समाज के बंधनों को बहुत ही गहराई के साथ व्यक्त किया जाता है। उनकी रचनाओं में यह देखते हैं कि नारी पात्रों को सिर्फ पीड़ित के तौर पर ही नहीं बताया गया है बल्कि उनको मजबूत, निर्णायक, विचारशील और संघर्ष से गुजरती हुई स्थिति में भी बताया गया है। उनकी रचनाओं में यह खास बात है कि स्त्रियां घरेलू, सामाजिक और भावनात्मक दृष्टि से तो जुड़ी होती ही है लेकिन उनमें आत्मसम्मान, पहचान और स्वतंत्रता की तलाश भी लगातार देखने को मिलती है। इन्होंने अपने नारी पात्रों की सहायता से पितृसत्तात्मक व्यवस्था, विवाह संस्था, मातृत्व की अवधारणा एवं स्त्री पुरुषों के आपसी संबंधों में जो असमानताएं होती हैं उनको बहुत ही सूक्ष्म रूप से प्रस्तुत किया है। यह लेख नारी पात्रों की मानसिक स्थिति, मौन की भाषा, भावनात्मक उपेक्षा एवं प्रतिरोध की बातों पर केंद्रित है। इस प्रकार, यह लेख हिंदी नारीवादी साहित्य विमर्श में उनके योगदान को समझाता है और यह बात स्थापित करता है कि उनकी रचनाएं स्त्री चेतना की मजबूत अभिव्यक्ति है।
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Pages:248-250
How to cite this article:
Shraddha Dharmkumar singh Bhadauria, Dr. Sharankhala "नारी पात्रों का अनुशीलन अल्पना मिश्र की रचनाओं में ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 248-250
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