Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
संतकाव्य में मानवीय मूल्य और आधुनिक समाज में उसकी प्रासंगिकता
Authors
अर्चना विश्वकर्मा
Abstract
हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में भक्तिकाव्य का महत्वपूर्ण योगदान है या यूं कहें कि भक्तिकाव्य अपने आप में एक तरह से समृद्ध है जिसमें इस काल विशेष के राम काव्य, कृष्ण काव्य, संत काव्य और सूफी काव्य इन चारों विचारधाराओं ने शास्त्र को लोक से जोड़ने का अथक प्रयास किया। चारों विचारधाराएं अपनी - अपनी विशेषताएं लिए हुए हैं। राम काव्य में राम और उनसे जुड़े रिश्तों के चरित्र, मर्यादा,सत्य को आदर्श मानकर समाज को उसके अनुरूप व्यवहार रखने की प्रेरणा दी गई, कृष्ण काव्य में भक्त कवियों ने अपने भावों को व्यक्त करते हुए कृष्ण को ईश्वर मित्र और अपना मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया जिससे समाज में नैतिकता के प्रसार हो।संतकाव्य में सामाजिक कुरीतियों,आडम्बरो, भेदभावों का खुलकर विरोध किया गया और आँखिन देखी पर विश्वास करने पर जोर दिया गया साथ ही मानवीय मूल्यों समानता का संदेश दिया। सूफी कवियों ने अपने काव्य के माध्यम से धर्म जाति और वर्ग से ऊपर उठकर समाज को प्रेम, सहिष्णुता और समानता का संदेश दिया। एक ही समय काल में ये सारी विशेषताएं होने के कारण ही जार्ज ग्रियर्सन ने समूचे भक्ति काल को ‘स्वर्ण काल’ कहा होगा।
संतकाव्य में कबीर, रैदास, मीरा, नामदेव, दादू आदि संत कवियों ने तत्कालीन समाज की समस्याओं, धार्मिक आडंबरों, जातिगत भेदभाव और आध्यात्मिक अज्ञानता के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की। संत कवियों ने अपनी काव्य साधना में ऐसी चेतना का परिचय दिया, जो अपने समय से आगे बढ़कर आधुनिक युग के विचारों से मेल खाती है। संतकाव्य न केवल उस समय के समाज में क्रांति लेकर आया, बल्कि आज भी यह समाज को जागरूकता और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाता है। आधुनिक युग में जब उपभोक्तावाद, जातिवाद, और धार्मिक कट्टरता जैसी समस्याएँ उभर रही हैं, तब संतकाव्य के मूल्य प्रासंगिक साबित होते हैं।शोध पत्र में इन्हीं मूल्यों का विस्तृत विवेचन किया जाएगा साथ ही संत काव्य की ऐतिहासिक पक्षों को भी समझा जाएगा।

Download
Pages:256-258
How to cite this article:
अर्चना विश्वकर्मा "संतकाव्य में मानवीय मूल्य और आधुनिक समाज में उसकी प्रासंगिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 256-258
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.