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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
लक्ष्मीकांत वर्मा के उपन्यासों में नारी के संघर्ष और संवेदना
Authors
श्रीनिवास मूर्ति के
Abstract
वेद नारी को अत्यंत महत्वपूर्ण,गरिमामय, एवं उचित स्थान प्रदान करते हैं। वेदों में स्त्रीयों की सिक्षा-दीक्षा, शील, गुण,कार्य-अधिकार और सामजिक भूमिका का जो सुंदर वर्णन पाया जाता है, वैसा संसार के अन्य किसी भी धर्मग्रन्थ में नहीं है। वेद उन्हें घर की रानी, देश की शासक, पृथ्वी की साम्राज्ञी तक बनने का अधिकार देते हैं। वेदों में स्त्री यज्ञीय है-अर्थात् यज्ञ समान पूजनीय। वेदों में नारी को ज्ञान देनेवाली सुख-संवृद्धि लानेवाली, विशेष तेजवाली, देवी, विदुषी, सरस्वती, इन्द्राणी, उषा (जो सबको जगाती है); इत्यादी अनेक आदर सूचक नाम दिए गए हैं। वेदों में स्त्रीयों पर किसी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं है। कन्या को अपना पति स्वयं चुनने का अधिकार देकर वेद पुरुष से एक कदम आगे ही रखते है। हिन्दी में भी प्रेमचंद, यशपाल, निराला, अज्ञेय तथा लक्ष्मीकांत वर्मा आदी के उपान्यासों में नारी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है
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Pages:273-275
How to cite this article:
श्रीनिवास मूर्ति के "लक्ष्मीकांत वर्मा के उपन्यासों में नारी के संघर्ष और संवेदना". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 273-275
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